Saturday, 27 June 2015

Gaane jo auto walon ke mann bhaye

आते जाते खूबसूरत आवारा सड़कों पर कभी कभी इटफाक से कितने अनजान लोग मिल जाते है उनमें से कुछ लोग भूल जाते है कुछ याद रह जाते है.....
ऐसा ही होता है रोज हमारे साथ । घर से निकलते ही कुछ दूर चलते ही एक रिकशे वाला मिलता है उसकी बाते सुनते सुनते हम अपने दूसरे सफ़र पर कब पहुँच जाते है पता ही नहीं चलता। ज़िन्दगी का एक और नया रोमांच शुरू होता है ऑटो वाले के साथ । ये वो कुछ लोग में से है जो रोजाना मिलते है कुछ याद रहते है कुछ भूल जाते है।
मजे की बात ये है उनके खूबसूरत दर्दनाक गाने जो कुछ लोग को मजा देता है या तो बोर करता है।याद कीजिये उनके वो रोमांटिक गाने या फिर वो भोजपुरी गाने या वो सैड गाने।यार बड़ा हिट हुआ था वो भोजपुरी गाना 'सान्या मिर्ज़ा की नतानिया जान मरेली री' जहाँ जाओ या जिस ऑटो में सफ़र करो बस यही गाना बजता था। और हाँ पता नहीं क्यों रोमांटिक गाने कम पर सैड गाने बहुत बजाते है। ऐसा लगता है इनका प्यार और दिल और घंटे रोटा है। एक्सम्पल के तौर पर कुछ गाने जो ऑटो वाले अक्सर बजाते है_
'दिल तोड़ कर हस्ते हो मेरा वफए मेरी याद करोगे'
दिल मेरा तोड़ दिया उसने बुरा क्यों मानु.....
जीत था जिसके लिए जिसके लिए मरता था.....
हमे तो लगता है ये गाना इन ऑटो वालो का मनपसंद  गाना होगा । यहाँ तक की कुछ ऐसे भी गाने है जो ऑडियो कैस्सेट से आज सीडी प्लेयर पर सुना जाता है। कुछ गाने तो ऐसे है जो उनके टूटे दिल की कहानी बया करते है जैसे
कितना हसीन चेहरा.....
मौका मिलेगा तो हम बता देंगे ......
सातों जनम में तेरे.....
ऐसे गाने उनके एक तरफ़हा  प्यार को बताते है।
इतनी थकान के बाद जब ऑटो में बैठते तब लगता है की थोड़ी सी शांती   मिल जाये तो क्या बात हो कुछ पल शान्ती से बिता सकूं लेकिन तब ही एक आवाज सुनाई देती है "धड़कन धड़कन धड़कन …… मेरी धड़कन " और ये धुन पूरा सफर बर्बाद कर  देती है । सफर सिर्फ धड़कन के साथ नहीं खत्म होता एक  नया गाना नींद को चुराने आता है "परदेसी परदेसी जाना नहीं "  अपने परदेसी  को तो रोक नहीं सके लेकिन उसकी पूरी दुश्मनी हम परदेसी से निकलते है ।
गानो की लाइन अभी खत्म नहीं हुई  अब जो गाना आ रहा है ये गाना मान लो की मेनू में मैन  कोर्स का  काम करता है ।  ऑटो ड्राइवर्स की सैड सॉंग की कलेक्शन होती है उसमे अल्ताफ राजा यू ऐस पी का काम करते है । उनके गाने सुन कर ऑटो वालों  ऐसी फीलिंग आती है जैसे की पहले कभी ऐसा महसूस न किया हो । बड़ा ही हिट गाना था अल्ताफ राजा का "तुम तो ठहरे परदेसी साथ क्या निभाओगे "ये गाना उनकी ड्रिवेनिंग  में चार चाँद लगा देता है ।
कभी कभी दिल करता है कुछ अच्छा सुनने का जिससे पूरी थकान झट में मिट जाये ,अगर आप ऐसा सोच कर कुछ बजने को कहते तो तो वो क्या बजायेंगे सोचिये ! सही सोचा "वोह लड़की बहुत याद आती है " फिर क्या बस कहना पड़ता है बस कर भाई बहुत अच्छा गाना बजाया ।
लेकिन अभी लिस्ट खत्म नहीं हुई अभी तो किलर गाने बाकी हैं । बेचारे ऑटो वाले अपनी प्रेमिका की शादी में अगर ड्राइवर बन जाना  तो क्या होगा ,कौन सा गाना बजेगा "हाँ मैंने भी प्यार किया.......
                                                                                            मुबारक हो तुमको ये शादी तम्हारी ……
ये गाने उनको जीने का और ड्राइव करने का सहारा देते हैं। नहीं तो क्या होता हमरे ऑटो वालों का अगर हमरे फिल्मकार वालों ने ये गाने नहीं बनाये होते।
कुछ और भी गाने है जिसने ऑटो वालों के टूटे दिल को जोड़ रखा है और बरनॉल का काम कर रही है  जैसे
सब कुछ भुला दिया ……
अछा सिल्ला दिया तूने मेरे प्यार का ....
आखिरी गाना  जो उन्हें हमदर्द के जैसा सम्हाला है "एक मुलाकात जरुरी है सनम "
लेकिन ये ऑटो ड्राइवर के गाने हम पैसेंजर्स का सर दर्द बन जाते हैं जिस वॉल्यूम में उनका दर्द हमारे सामने आता वो हमारा सर बन जाता है और काम सुन कर देता है ।
इसलिए कृपा कर वॉल्यूम और अपने गानो के लिस्ट बदलें "जिए और जीने दें ।



Wednesday, 29 April 2015

लाल था तू मेरा

लाल था वो मेरा बचा न सके 
किस्मत की अंधी से छुपा न सके 
महंगाई की केहर से बचा न सके 
लाल था वो हमारा बचा न सके 

छुपाना था उसे माँ की आँचल में 
पर अंचल को मौसम की चपटे ने फाड़ डाला 
तिनका तिनका करके संजोया था जिसे 
पूरी मेहनत और कमाई से बोया था जिसे 
लाल था वो हमारा दुनिया की नज़रों से छुपा  न सके 

धरती माँ की गोद में सोचा था सुरक्षित होगा 
माँ का प्यार उसे हर दुःख से बचाएगा 
खुशियों का संसार होगा माँ की गोद में 
पर ऐसा क्या हुआ धरती माँ ने भी छोड़ दिया साथ हमारा 
  लाल था वो माँ का क्यों माँ न बचा सकी ?

हर दुःख को भगवान का प्रशाद समज स्वागत किया 
हर कठनाइयों से बचा कर बड़ा किया 
अब समय था उसकी लहराती हांथो को पकड़ने का 
उसकी  चमकती हुई  आँखों  में अपने मेहनत  को देखने का 
उसके खिले हुए चेहरों में खुद को पहचानने का 
हर चुनौती सामना कर 
हर धुप छाओं  से बचा कर लाया जिसे 
क्या पता था आज मैं उस लाल को बचा ना सकुंगी 
लाल था वो मेरा

काश मैं ये देखने से पहले खुद खो जाता 
या समय को वापस वहीँ ले जाता 
तुझे बचाता या खुद मिट जाता
उस बेटे से न थी उमीद जो हमारा लाल है 
उस बेटे से थी उमीद जिसे मैंने धरती माँ के गोद मे बोया था
तुझे बचा न सका मेरे लाल 
लाल था तू मेरा

खुद को कोसूं या उस भगवान को 
जिम्मेदारी मेरी थी
लाल तू मेरा था न की भगवान का...

यादों की परछाइयाँ

बहुत सुना था माँ से
छोटी थी तो ऐसी थी
बहुत शरारत किया करती थी
खुशियों में चार चाँद लग गए
जब सुना हमारी शरारत में एक और शरारती था

अगर तुम न होते
तो ये शरारते अधूरी थी
हमारे किस्से अधूरे थे
हमरा प्यार अधूरा था

अगर तुम न होते
उस एहसास से हम मेहरूम होते
एक साया बन के साथ रहे
वो पल मेरे जीवन का एहसास बन गए
मेरी खुशियों की पहचान बन गए

अगर तुम न होते
तो कौन दोस्त बन के हाँथ थमता
कौन भाई बन के डाँटता
गिरी जब मैं किसी राह पे
आंसू आये तुम्हारे आँख से
और वो आंसू मेरी खुशियों को मोती दे गए

अगर तुम न होते
तो कौन मेरी छोटी छोटी खुशियों में खिलखिलाता
कौन हकीकत में रुलाता और ख़्वाबों में हँसता
वो बचपन के पल बाते बन गयी
आज वही बातें यादें बन गयी


Tuesday, 28 April 2015

अगर तुम न होते

Iअगर तुम न होते ,
कभी सोचा भी न था तुम्हारे बिना ये ज़िन्दगी ,
पता भी न था कब और कैसे तुम इस दिल के मेहमा बन जाओगे
अगर तुम न होते,
तो वीरान थी ये ज़िन्दगी
तुम्हारे आने से एक मक़सद मिला ज़िन्दगी को
दिल को धड़कना तुम ने सिखाया 
विश्वास न था कभी हमें भी होगा प्यार
उस प्यार का एहसास दिलाया तुम ने 
अगर तुम न होते,
चल रही थी ये ज़िन्दगी 
पर ज़िन्दगी को रफ्तार दिलाया तुम ने 
तुम नहीं होते
 तो तुमसे मिलने की चाह करता है ये दिल
तुम नहीं होते
तो तुम्हे देखने की राह तकती है ये आँखे
कैसे बताऊ तुमको की कितना प्यार है तुमसे
कैसे बताऊ तुम्ही से शुरू और तुम्ही में अन्त है मेरा
तुम्हारे कदमो की आहट से ही मेरी ज़िन्दगी चेहक उठती है
डर लगता है कहीं तुम मेरा साथ न छोड़ दो
डर बस इतना है की अगर तुम न होंगे तो ज़िन्दगी थम जायेगी
अगर तुम न होते
चिराग तो जलते लेकिन रौशनी न होती
अगर तुम न होते.............

Thursday, 9 April 2015

........chal yaar jhadu maar.......

लक्ष्मी धन की देवी कहलाती है , मान्यता ये भी  है कि जहाँ सफई होती है वहाँ लक्ष्मी का वास होता है। और जहाँ सफई नहीं वहाँ वही लक्ष्मी दरिद्रता का रूप धारण कर लेतीं है। पूरे साल सफई हो न हो लेकिन दीपावली में घर की स्वक्षता और सजावट का पूरा ध्यान रहता  है।  लक्ष्मी जी को प्रसन करने में  कमी नहीं रहती। पुरे घर के कोने कोने से लेकर हर तरफ की सफई हो जाती है।  लेकिन क्या अपने ध्यान दिया की घर तो साफ़ हो गया उस सड़क क्या जहाँ हम अपने घर का कूड़ा बिना सोचे समझे ढाल देते है। जैसे हम दरवाजे से घर में प्रवेष लेते है उसी प्रकार भगवान भी उसी सड़क उसी दरवाजे से आते है  जहाँ कूड़े का ढेर देख  कर लक्ष्मी उलटे पैर वापस हो जाती है। हम अपनी सोच में परिवर्तन  क्यों नहीं लाते अगर दस झाड़ू घर के लिए तो एक  बहार के लिए क्यों नहीं ?
घर की सफाई हम अपनी ख़ुशी से करते है तो  क्या सड़क हमारी नहीं , कॉलोनी  हमारी नहीं , ये शहर हमारा नहीं या ये देश हमारा नहीं ! बस देरी है अपने सोच पर , अपने दिमाग पर  एक झाड़ू मारने की। जब  हमारी सोच में स्वक्षता आएगी तब हमारे समाज में हमरे देश में  स्वक्षता का एक फूल खिलेगा और वो फूल पूरी दुनिया को अपनी महक से सुगन्धित कर देगा। 
लेकिन कभी कभी मायूसी तब छा जाती है जब हमारे पढ़े लिखे समाज में कुछ ऐसे भी है जो झाड़ू  पर नहीं सफाई पर नहीं गन्दगी फैलाने पर विश्वास रखते है। 
                              
                                    'सोच को बदलो , सितारे अपने आप बदल जायेंगे ,
                 खुद एक गन्दगी है भारत में , इसको साफ़ करने के लिए भी कोई झाड़ू उठाओ ,
                                              एक हाँथ उठेगा ,लाखो को बुलाएगा 
                                 और तब जाके कहलायेगा स्वक्ष देश हमारा भारत'

बड़े बड़े लोग जब झाड़ू उठाते है तो न्यूज़ बन जाती है और अगर एक सफाई कर्मचारी अपना पूरा समय उस झाड़ू के साथ व्यतीत करता है तो उसके बारे में कितने पत्रकार है जो उस सफाई कर्मचारी को अपने न्यूज़ का हिसा बनाता है। दिखावये से ज्यादा जरुरी है की हम कुछ करे ऐसा जो देश के हित में हो , देश वाषियों के हित में हो।  झाड़ू एक सोच है जो देश में फैली गन्दगी  ख़त्म करेगा। भ्रस्टाचारी , भूसखोर नेता और कर्मचारी जो देश में समाज में गन्दगी फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ते उनकी इसी सोच को बदलने के लिए देश वाशियों ने अपने हाँथ में झाड़ू उठा लिया है हमारे देश से गन्दगी तो मिटेगी ही यहाँ तक की उम्मीद है की भ्रस्टाचारियों की सोच पर भी झाड़ू लगेगा। झाड़ू सिर्फ बहार की सफाई के लिए ही नहीं मंन की सफाई का प्रतीक है।
                         'एक छोटी सी चीज़ है ये झाड़ू , लेकिन काम करोड़ों के करती है 
                            पुरे समाज की सोच को बदलने का काम करती  है ये झाड़ू '
 
गांधी जी ने कहा था स्वतंत्रता से ज्यादा महत्वपूर्ण है स्वक्छ्ता। वे जानते थे की  क्या हाल होने वाला है हमारी भारत  जनता का। शहरी लोग तो अपने घर को साफ़ रखते है पर उन गाओं वालों का क्या जिनके यहाँ एक शौचालय तक नहीं है। उनके  घर की महिलाओं , बच्चों और  बाकी घर के सदस्यों को बहार जाना पड़ता है शौच के लिए। जिन महिलाओं का घूँघट उढ़ाना भी गवारा नहीं उनको बहार शौच के लिए जाना पड़ता है। 21 वीं सदी में है हम लेकिन सोच अभी भी वही दखियानुषी है। अगर शौच के लिए आदमी एक से दो बार जाता है तो उसे बिना नहाये धोये घर में प्रवेश नहीं करना है। यही कारण है की लोग गाओं में शौचालय नहीं बनवाते  अगर बनवाते भी है तो घर से बहार। इसी  सोच ने समाज में गन्दगी फैला रखी है। इसी सोच पर जरुरत है झाड़ू मारने की। पुरानी दखियानुषी बातों पर झाड़ू चलने की। गाओं की समस्या से लड़ने के लिए सरकार ने 'स्वक्ष भारत  अभियान ' की शुरुवात की है। जिसके अन्तर्गत शौचालय निर्माण , स्वक्षता की सोच भारत में लायी गयी है। आज नाले , तालाब और नदियों को साफ़ करने का बीड़ा उड़ाया गया है। ये बीड़ा सिर्फ इसलिए ताकि आने वाली पीढ़ी स्वक्ष औए शीतल वायु में सांस ले सके। आने वाली पीढ़ी को भी इस बात की जागरूकता रहे की झाड़ू सिर्फ घर के लिए नहीं बहार और हमारी सोच को साफ़ रखने के लिए भी जरुरी है। जब जागरूकता आएगी तभी बदलाओ दिखेगा।

Sunday, 15 February 2015

shiqayton se bhari zindagi..........

छोटी सी जिंदगी और लाखों शिकायतें !
कभी पड़ोसियों से तो कभी दोस्तों में तो कभी फैमिली से या फिर खुद से। मुझे भी है शिकायत उससे जो सब कुछ होते हुए भी हमेशा शिकायत और सिर्फ शिकायत ही करता रहता है। उस इंसान को शायद कभी सैटिस्फैक्शन होती ही नहीं। 
इस छोटी सी जिंदगी को क्या चाहिए ? रोटी ,कपड़ा और सर ढकने के लिए छत। ये तो हुई एक आम आदमी की जरुरत। कभी शिकायत  भी करना चाहे तो किससे करे ,अपनी जरुरत बताना भी चाहे तो किससे बताये , उस भगवान से जो सुनता है पर शायद आम आदमी के लिए थोड़ा कम , लो अब मै भी शिकायत करने लगी भगवान से !
अगर मेरे पास एक स्कूटर है तो मुझे उस आदमी से शिकायत होगी जो पल्सर चलता हो और पल्सर वाले को रॉयल थंडरबर्ड से। एक स्कूटर हमारी जरुरत पूरी कर  सकता है लेकिन हमें वो सैटिस्फैक्शन नहीं दे पाता। ये शिकायते कभी खत्म नहीं होगी इसका चैन इतना मजबूत है जैसे बिरला सीमेंट की दीवारें 'मजबूती और विशवास  का दूसरा नाम ' अगर विशवास की बात करे तो हमारे पेरेंट्स को हमसे बहुत शिकायतें  होती है।  ये शरारत नहीं करता, ये बहुत शरारती है ,ये पढता नहीं ,ये पढ़ने के अलावा कुछ करता ही नहीं , ये मेरा बेटा ही नहीं। हाय रे ! ये शिकायतें कब होगी खत्म। कहाँ से लाएं ऑलराउंडर जिससे इन्हे मिले वो किक , और हमें मिले शिकायतों से एंड …… 
घर  से ,स्कूल से और इस कॉम्पेटेटिव भरी दुनियाँ से इतना प्रेशर है आज के युवाओं पर ऐसा लगता है कि कहीं न कहीं वो अपनी मासूमियत खो दे रहे है।  बड़े बड़े बश्तों में छोटी छोटी खुशियां अपना दम तोड़ती नजर आती है। अपनों को सटिस्फाई करने में ,उनकी शिकायतें दूर करने में वो खुद को खो बैठे है। 
खोना या पाना गलत नहीं है लेकिन उसकी भी लिमिट होनी चाहिए। लाइफ तब तक एक्साइटमेंट नहीं होता जब तक हम कुछ खोना न सीखे। खोने से शिकायत शुरू होती है और पाने से और पाने की शिकायत। 
वैसे अभी शिकायतों की लिस्ट खत्म नहीं हुई ये तो ट्रेलर था पिक्चर अभी बाकी है यारों !आपको पता है सबसे ज्यादा शिकायत किसको है अभी के लिए तो मुझे, पर  सबसे ज्यादा शिकायतें होती है आपकी गिर्ल्फ्रेंड  या बॉयफ्रेंड या फिर आपके जीवनसाथी को !उनकी फर्महिशें और शिकायतों का तो खान होता है , कभी न खत्म  होने वाली शिकायत। ज्यादा दूर जाने की जरुरत नहीं कल वैलेंटाइन्स डे पर कितनो  ने शिकायत दूर की तो कितनो की शिकायत खत्म नहीं हुई। लेकिन प्यार में शिकायत न हो तो लाइफ दाल तो होगी पर बिना तड़के की। 
जो दिक्कत और शिक़तें हमरी जिंदगी को ख़त्म करने को आती है शायद ये भगवान हमें कुछ सीख देने के लिए लाते है। अपने सुना होगा जब हम छोटे थे तो मम्मी माना किया करती थीं 'इसे न छूना नहीं तो जल जाओगे ' हम ने सीखा लेकिन छोट खा के। जिंदगी ,पैसा,और रिश्तों की पहचान तभी होती है जब हम उसे खो देते है।  जिन शिकायतों के साथ हम बड़े होते है या तो हमें बनाएंगे   या बर्बाद ,ये हम पे डिपेंड करता है। ये जरूयत ही तो है जो कहती है शिकायत करो ! जिस दिन हमें ये महसूस होगा की अब बहुत हो गया हमारी जरुरत जितनी थी हमें मिल चुकी है ,उस दिन शिकायत भी नहीं होगी ,न खुद से , न समय से और न ही भगवान से। 
कुछ ऐसे भी लोग है जिन्हे कभी रेअलाइज़ भी नहीं होगा की उन्हें वो सब मिल रहा है जिसकी उनको जरुरत भी नहीं लेकिन फिर भी उनके हाँथ उठे है शिकयत के लिए। ऐसे लो और कोई नहीं हमारे प्यारे नेता लोग ही है ,जितना उनके पेट में जाता उतना कम होता है। जरुरत जन्म देती है शिकायत , और शिकयत इन्हे बना देती है भ्रस्टाचारी। इंसानो की इस दुनियां ने एक नेता ऐसी प्रजाति है जिसके शिकयतों का कोई अन्त नहीं। आप इन्हे एक और नाम दे सकते है 'आपके जीवनसाथी ' आप हार जायेंगे लेकिन इनकी जरूरते कभी खत्म नहीं होगी। कोई तो रोक लो ये अपना  जेब कितना भरेंगे ,कब खत्म होगी इन नेताओं की जरुरत? काश मैं इनको बंता  सकती की इनके घर में बहुत है थोड़ा हम गरीबों के लिए छोड़ दे। एषा करे की हम भी कहे की एषा नेता आया जो खा के नहीं बना के गया। 
हमरी भी तो शिकायत कोई दूर करे 
'जिंदगी कैसी है पहेली हाय ,कभी ये रुलाये कभी ये हसाए ' जिन्दगी इसी गाने के जैसे है हमारी। मैंने तो बता दिया मुझे कितनी और कितने लोगो से शिकायत है।  चलते चलते आपसे एक और बात शेयर करना चाहूंगी। अगर आप चाहते है की जिंदगी हमेशा खुशियां बरसाए तो व्यक्ति को काम से काम शिकायत करनी चाहिए ,वही इस जगत में अधिक से अधिक शुखी है जिसकी शिकायत कम से कम है। 
Any fool can criticise complain and condemn 
and most fools do but 
it takes character and self control to be 
understanding and forgiving. 


जूही श्रीवास्तव