Sunday, 15 February 2015

shiqayton se bhari zindagi..........

छोटी सी जिंदगी और लाखों शिकायतें !
कभी पड़ोसियों से तो कभी दोस्तों में तो कभी फैमिली से या फिर खुद से। मुझे भी है शिकायत उससे जो सब कुछ होते हुए भी हमेशा शिकायत और सिर्फ शिकायत ही करता रहता है। उस इंसान को शायद कभी सैटिस्फैक्शन होती ही नहीं। 
इस छोटी सी जिंदगी को क्या चाहिए ? रोटी ,कपड़ा और सर ढकने के लिए छत। ये तो हुई एक आम आदमी की जरुरत। कभी शिकायत  भी करना चाहे तो किससे करे ,अपनी जरुरत बताना भी चाहे तो किससे बताये , उस भगवान से जो सुनता है पर शायद आम आदमी के लिए थोड़ा कम , लो अब मै भी शिकायत करने लगी भगवान से !
अगर मेरे पास एक स्कूटर है तो मुझे उस आदमी से शिकायत होगी जो पल्सर चलता हो और पल्सर वाले को रॉयल थंडरबर्ड से। एक स्कूटर हमारी जरुरत पूरी कर  सकता है लेकिन हमें वो सैटिस्फैक्शन नहीं दे पाता। ये शिकायते कभी खत्म नहीं होगी इसका चैन इतना मजबूत है जैसे बिरला सीमेंट की दीवारें 'मजबूती और विशवास  का दूसरा नाम ' अगर विशवास की बात करे तो हमारे पेरेंट्स को हमसे बहुत शिकायतें  होती है।  ये शरारत नहीं करता, ये बहुत शरारती है ,ये पढता नहीं ,ये पढ़ने के अलावा कुछ करता ही नहीं , ये मेरा बेटा ही नहीं। हाय रे ! ये शिकायतें कब होगी खत्म। कहाँ से लाएं ऑलराउंडर जिससे इन्हे मिले वो किक , और हमें मिले शिकायतों से एंड …… 
घर  से ,स्कूल से और इस कॉम्पेटेटिव भरी दुनियाँ से इतना प्रेशर है आज के युवाओं पर ऐसा लगता है कि कहीं न कहीं वो अपनी मासूमियत खो दे रहे है।  बड़े बड़े बश्तों में छोटी छोटी खुशियां अपना दम तोड़ती नजर आती है। अपनों को सटिस्फाई करने में ,उनकी शिकायतें दूर करने में वो खुद को खो बैठे है। 
खोना या पाना गलत नहीं है लेकिन उसकी भी लिमिट होनी चाहिए। लाइफ तब तक एक्साइटमेंट नहीं होता जब तक हम कुछ खोना न सीखे। खोने से शिकायत शुरू होती है और पाने से और पाने की शिकायत। 
वैसे अभी शिकायतों की लिस्ट खत्म नहीं हुई ये तो ट्रेलर था पिक्चर अभी बाकी है यारों !आपको पता है सबसे ज्यादा शिकायत किसको है अभी के लिए तो मुझे, पर  सबसे ज्यादा शिकायतें होती है आपकी गिर्ल्फ्रेंड  या बॉयफ्रेंड या फिर आपके जीवनसाथी को !उनकी फर्महिशें और शिकायतों का तो खान होता है , कभी न खत्म  होने वाली शिकायत। ज्यादा दूर जाने की जरुरत नहीं कल वैलेंटाइन्स डे पर कितनो  ने शिकायत दूर की तो कितनो की शिकायत खत्म नहीं हुई। लेकिन प्यार में शिकायत न हो तो लाइफ दाल तो होगी पर बिना तड़के की। 
जो दिक्कत और शिक़तें हमरी जिंदगी को ख़त्म करने को आती है शायद ये भगवान हमें कुछ सीख देने के लिए लाते है। अपने सुना होगा जब हम छोटे थे तो मम्मी माना किया करती थीं 'इसे न छूना नहीं तो जल जाओगे ' हम ने सीखा लेकिन छोट खा के। जिंदगी ,पैसा,और रिश्तों की पहचान तभी होती है जब हम उसे खो देते है।  जिन शिकायतों के साथ हम बड़े होते है या तो हमें बनाएंगे   या बर्बाद ,ये हम पे डिपेंड करता है। ये जरूयत ही तो है जो कहती है शिकायत करो ! जिस दिन हमें ये महसूस होगा की अब बहुत हो गया हमारी जरुरत जितनी थी हमें मिल चुकी है ,उस दिन शिकायत भी नहीं होगी ,न खुद से , न समय से और न ही भगवान से। 
कुछ ऐसे भी लोग है जिन्हे कभी रेअलाइज़ भी नहीं होगा की उन्हें वो सब मिल रहा है जिसकी उनको जरुरत भी नहीं लेकिन फिर भी उनके हाँथ उठे है शिकयत के लिए। ऐसे लो और कोई नहीं हमारे प्यारे नेता लोग ही है ,जितना उनके पेट में जाता उतना कम होता है। जरुरत जन्म देती है शिकायत , और शिकयत इन्हे बना देती है भ्रस्टाचारी। इंसानो की इस दुनियां ने एक नेता ऐसी प्रजाति है जिसके शिकयतों का कोई अन्त नहीं। आप इन्हे एक और नाम दे सकते है 'आपके जीवनसाथी ' आप हार जायेंगे लेकिन इनकी जरूरते कभी खत्म नहीं होगी। कोई तो रोक लो ये अपना  जेब कितना भरेंगे ,कब खत्म होगी इन नेताओं की जरुरत? काश मैं इनको बंता  सकती की इनके घर में बहुत है थोड़ा हम गरीबों के लिए छोड़ दे। एषा करे की हम भी कहे की एषा नेता आया जो खा के नहीं बना के गया। 
हमरी भी तो शिकायत कोई दूर करे 
'जिंदगी कैसी है पहेली हाय ,कभी ये रुलाये कभी ये हसाए ' जिन्दगी इसी गाने के जैसे है हमारी। मैंने तो बता दिया मुझे कितनी और कितने लोगो से शिकायत है।  चलते चलते आपसे एक और बात शेयर करना चाहूंगी। अगर आप चाहते है की जिंदगी हमेशा खुशियां बरसाए तो व्यक्ति को काम से काम शिकायत करनी चाहिए ,वही इस जगत में अधिक से अधिक शुखी है जिसकी शिकायत कम से कम है। 
Any fool can criticise complain and condemn 
and most fools do but 
it takes character and self control to be 
understanding and forgiving. 


जूही श्रीवास्तव